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Rishikesh: कथा मर्मज्ञ डा. राम कमल दास वेदांती महाराज ने कहा कि बच्चों को संस्कारवान बनाकर सत्संग कथा के लिए प्रेरित करना चाहिए। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है और शांति व मुक्ति मिलती है।
बुधवार को श्री भरत मंदिर में ब्रह्मलीन महंत अशोक प्रपन्नाचार्य की पुण्यतिथि पर श्रीमद भागवत कथा का आयोजन हुआ, जिसके शुभारंभ पर कलश यात्रा निकाली गई। श्रीभरत मंदिर से निकली कलश यात्रा झंडा चौक, सुभाष चौक, घाट रोड होते हुए त्रिवेणी घाट पहुंची। वहां कलश में गंगा जल भरा गया। उसके बाद कलश यात्रा मंदिर परिसर में पहुंचकर संपन्न हुई।

पहले दिन कथा वाचक डा. रामकमल दास वेदांती महाराज ने कहा कि कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब हम इसको अपने जीवन और व्यवहार में अपनाते हैं और जन कल्याण के लिए कार्य करते हैं। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन और कानों के रस तक ही सीमित रह जाएगी। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण, निरंतर हरि स्मरण करने और भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है। श्रीमद भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है। वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है, इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए।
कथा के प्रथम दिन कैबिनेट मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने पहुंचकर संतो का आशीर्वाद लिया। मौके पर श्रीभरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्नाचार्य महाराज, हर्षवर्धन शर्मा, वरुण शर्मा, जयराम आश्रम के अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी, महामंडलेश्वर स्वामी ललिता नंद महाराज, हरी चेतनानंद महाराज, महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी दयाराम दास महाराज, महामंडलेश्वर अरुण दास, सतपाल ब्रह्मचारी आदि मौजूद रहे।
