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Rishikesh: शहर के कारोबारी ने शहर में तंग गलियों में घनी आबादी के बीच नियमों की धज्जियां उठाते ही चार मंजिला इमारत खड़ी कर दी, लेकिन एमडीडीए को इसकी भनक तक नहीं लगी। किसी तरह से प्राधिकरण तक मामला पहुंचा, तो अधिकारियों की नींद खुली। उन्होंने नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया, जिसमें दो मंजिल बगैर नक्शे के निर्मित मिली। बिल्डिंग की सीलिंग के आदेश होने के बावजूद अभीतक कार्रवाई नहीं होने से अधिकारियों की भूमिका सवालों में है।
दरअसल, कुछ दिनों पहले मनीराम मार्ग पर्र कारोबारी ने बहुमंजिला भवन का निर्माण शुरू किया। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) से दो मंजिल का नक्शा भी पास कराया, लेकिन नियमों को ताक पर रख घनी आबादी में दो मंजिल अवैध तरीके से खड़ी कर दी। शुरूआत में प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर निर्माणकर्ता से जवाब पेश करने को कहा। दो मंजिल निर्माण की अनुमति नहीं होने की पुष्टि पर सीलिंग के आदेश जारी हुए। हैरानी की बात यह है कि सीलिंग के आदेश को तामील करने में अब प्राधिकरण के स्थानीय अफसर प्रशासनिक अफसर उपलब्ध नहीं होने की दलील दे रहे हैं। निर्माणकर्ता सचिदानंद शर्मा ने बताया कि यह इमारत उनकी है। उनसे गलती हुई है, लेकिन ज्यादा जानकारी ठेकेदार ही दे पाएगा। कंपाउंडिंग के लिए पत्र दिया गया है।
सहायक अभियंता सुरजीत सिंह रावत ने बताया कि सीलिंग के आदेश पर कार्रवाई के लिए टीम निकली थी, मगर एसडीएम और पुलिस फोर्स के वीवीआईपी कार्यक्रम व्यस्त होने के चलते लौटना पड़ा। जल्द ही निर्माणाधीन भवन को सील जाएगा। वहीं, सूत्रों का दावा है कि निर्माणकर्ता ने कंपाउंडिंग के लिए भी प्राधिकरण की शरण ले ली है।
मनीरोड रोड पर अवैध निर्माण…सीलिंग की बजाय MDDA ने ओढ़ी दलीलों की चादर!
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